बुद्धू धीरे धीरे डालना / Buddhu dhire dhire dal na

मेरा नाम रोहन है, मैं भी अपने जीवन में घटी कुछ मजेदार बातें आप सभी के साथ करना चाहता हूँ। मेरी जीवन में जो सबसे पहला चुदाई का मौका आया उस समय तो मुझे सेक्स के बारे में कुछ ज्ञान भी नहीं था।

बात उन दिनों की है जब मैं बारहवीं में पढ़ा करता था हमारे पड़ोस में एक लड़की रहा करती थी उसका नाम शालू था। वो थी तो 18 साल की पर उसके चूचों का साइज़ उसके टॉप में से भी साफ़ नजर आता था, जब कभी झुकती थी तो ऐसा गरमागरम नजारा दिखता था कि लंड उफान पर आ जाता था।

उसकी गांड इतनी मोटी कि जींस फटने को होती थी।

बहुत सेक्सी थी वो !

वैसे तो दिखने में तो मैं भी कुछ कम ना था पर काफी शर्मीला था।

एक दिन मैं शाम को हमेशा की तरह अपनी छत पर बैठा था तो नजर बगल वली छत पर गई, वहाँ शालू बैठी थी, उसने इतनी कसी हुई टीशर्ट पहनी थी कि उसके चूचे आधे बाहर निकल रहे थे पर स्वभाव से शर्मीला होने के नाते मैंने नजर हटा ली पर शायद शालू ने यह देख लिया।

उस दिन तो कुछ नहीं हुआ पर अगले दिन शाम को जब मैं दुबारा छत पर गया तो शालू वहाँ पहले से खड़ी थी और मुझे तिरछी नजरों से देख रही थी और मुस्करा रही थी।

मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई, अब रात को मैं बस यही सोचता रहा कि उसके चूचे और गांड पर हाथ लगाने का मौका मिल जाये पर मुझे कहाँ पता था कि यह मौका इतनी जल्दी मिलेगा।

नजरें मिलाने का सिलसिला चलता रहा, वो मुस्कराती और मैं शरमा जाता। लड़का तो मैं था पर हरकतें लड़कों वाली उसकी थी। बहुत कोशिश के बावजूद भी मैं बात नहीं कर पा रहा था।

एक दिन उसने खुद इशारा करके मुझे बुलाया पास जाने पर कहा- तुम्हें समझ नहीं आता कि मैं तुम्हें देख कर क्यों मुस्कराती हूँ?

मैंने अनजान बनने की कोशिश की तो उसने कहा- बुद्धू, मैं तुम्हें चाहने लगी हूँ।

मैं तो मन ही मन झूमने लगा।

अब मैं रोज शाम को छत पर जाता और उससे बात करता।

एक दिन बात करते करते मैंने उसके चूचे को छू लिया तो उसने कहा- यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने कहा- तुम्हारे चूचे इतने बड़े है कि छूने का मन करता है।

तो उसने कहा- बस छूने का?

मैं उसकी बात समझ गया, वो चाहती थी कि मैं उसके चूचों को चुसूँ। मैंने भी एक पल ना गंवाते हुए उसका टॉप उतार दिया, फिर जो नजारा था ! हाय ! आज भी वो याद आता है तो लंड बेकाबू हो जाता है।

उसकी कसी हुई ब्रा में उसके चूचे बड़े सेक्सी लग रहे थे। मैंने उन्हें ब्रा से भी मुक्त कर दिया।

अब मैं उसके उन बड़े और कसे हुए चूचों को चूसने लगा, वो सिसकारियाँ भरने लगी और मेरा सर पकड़ कर अपने चूचों को रगड़ने लगी। उसे मजा आ रहा था, वो मदहोश हो रही थी, उसने अब मुझे अपनी टीशर्ट उतारने के लिए कहा।

उसके बाद वो मेरी छाती पर किस करने लगी। मैंने बहुत बार ब्लू फ़िल्म देखी थी, बस अब वही सब करने का मन हुआ, मैंने उसकी जींस में हाथ डाल दिया तो उसने हाथ निकाल कर कहा- नहीं, ये सब नहीं !

तो मैंने नाराज होने का ड्रामा किया।

सच है कि लड़कियों को इमोशनल करके कुछ भी कराया जा सकता है। तो उसने मुझे वादा किया कि सही समय आने पर वो सब कुछ करेगी। उसका वादा लेकर मैं वहाँ से चला गया।

वो शुभ घड़ी जल्दी ही आ गई जब उसके घर पर कोई ना था, तो उसने मुझे बुला लिया, उसने और सारा बंदोबस्त किया हुआ था, यहाँ तक कि पता नहीं वो कंडोम कहाँ से ले आई।

उसके घर पहले तो हम बात ही करते रहे फिर मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसके बूब्स दबाने लग गया। वो पागल होने लगी और उसने मेरा लंड पकड़ लिया, एक दूसरे को हमने निर्वस्त्र कर दिया। उसका वो नग्न बदन देख कर मैं पागल हो गया मैंने उसे जकड़ लिया और वहीं बिस्तर पर उसके ऊपर लेट गया, अपना बदन उसके बदन पर रगड़ने लगा।

मैंने उसके होंठ पूरी तरह अपने होंठों में ले लिए और साथ साथ उसके चूचे दबाने लगा। दस मिनट तक हम यों ही लगे रहे।

अब उसने मेरा लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी। उसकी हरकतों से लगा कि शायद यह पहले भी किसी के साथ सेक्स कर चुकी है। पर मुझे कहाँ परवाह थी, मुझे तो बस उसका रस लेना था।

मैंने उसे थोड़े दबे स्वर में कहा- मेरा लंड चूस दे !

मुझे लगा कहीं वो बुरा ना मान जाये पर मेरे कहने की देरी थी, उसने मेरा लंड चूमना शुरु कर दिया। वो एहसास शायद मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता, जैसे जैसे वो मेरा लंड मुँह में अन्दर ले जाती उसकी जीभ की गर्माहट मुझे अपने लंड में महसूस होती। उसने तो एक पक्की चुसैल की तरह मेरा लंड चूसा।

करीब 15 मिनट तक उसने मेरा लंड चूसा फिर मेरे बिना कुछ कहे बिस्तर पर टांगें फ़ैला कर लेट गई और कहा- सारे मजे तू ही लेगा या मुझे भी देगा?

मैं उसके चेहरे पर वासना देख सकता था, उसे चुदने की आग लगी हुई थी।वो मेरे शुरु होने से पहले ही अपनी चूत में उंगली डाल कर मुठ मारने लगी। उसकी इन हरकतों से मुझे भी सेक्स का भूत सवार हो गया, वासना के जोर में मैं कंडोम लगाना भी भूल गया और सीधा लंड उसकी चूत पर टिका दिया।

उसने टांगें और फ़ैला ली और कहा- धीरे धीरे डालना, नहीं तो दर्द होगा।

मैंने ऐसे ही किया, धीरे धीरे लंड अन्दर जाने लगा, चूत खुलने लगी, शालू चिल्लाने लगी- आह अआह आह !

वो अभी अक्षतयौवना थी क्योंकि उसका खून निकल रहा था। पर जब वासना आपके दिमाग में आ जाये तो दर्द वगैरह बेमानी लगते है। मैंने लंड बाहर निकाला तो देखा कि मेरा लंड भी लहूलुहान है, उसमें से भी खून निकल रहा है।

मैं डर गया तो शालू ने कहा- डरो मत, तुम्हारी भी सील टूट गई, तुम मर्द बन गये।

फिर मैंने दुबारा लंड को चूत पर रखा और धक्के मारने लगा। शालू दर्द से पागल होने लगी और चिल्लाने लगी- आह आह आह ! जोर से मारो !

और मेरे बदन को नोचने लगी।

मुझे भी सेक्स का चरम अनुभव करना था, मैंने उसे घोड़ी बन जाने के लिए कहा। उसने ऐसा ही किया पर कहा- गांड में मत डालना, दर्द होता है।

मुझे भी उस समय बस चूत ही नजर आ रही थी क्योंकि वो मेरा पहला सेक्स अनुभव था। मैंने उसके चूचे हाथ में लेकर पीछे से लंड डाल दिया और उसे चोदने लगा।

वो इतना मजा ले रही थी कि एक हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी।

मैंने उसे खूब जोर से चोदा।

अब मुझे लंड में कुछ अनुभव होने लगा तो शालू ने भी कहा- मैं झड़ने वाली हूँ !

मैंने कहा- एक साथ झाड़ते हैं।

उसके बाद के झटके तेज हो गये, शालू ने भी गांड उठा उठा कर चूत मरवाई और हम दोनों झड़ गये।

उसके बाद उसने फिर से मेरा लंड चूसा और उस दिन मैंने उसे तीन बार और चोदा अलग अलग तरीके से और यह सिलसिला आज तक जारी है। मैं पिछले 8 साल से शालू को चोद रहा हूँ और उससे सेक्स के सारे अनुभव ले रहा हूँ।