ग्वालियर में काल गर्ल की चूत की चुदाई / Gwalior Me Call Girl Ki Choot Ki Chudai

मेरी पिछली कहानी
साली की चूत चुदाई के साथ पड़ोसन की गांड
में आपने पढ़ा कि जब दिन में ही मैं अपनी साली को चोद रहा था तो मेरी एक पड़ोसन गुड्डी ने हमें रंगे हाथों पकड़ लिया और वो भी खुशी खुशी हमारे खेल में शामिल हो गई।

तो आगे की कहानी कुछ इस प्रकार है जरा गौर फरमाएँ-

उसके बाद मेरी साली जी वापिस अपने घर चली गई और कुछ दिनों बाद मेरी बीवी का पैर भी ठीक हो गया लेकिन न जाने क्यूँ मुझे अब बाहर का माल कुछ ज्यादा ही रास आने लगा था।

उन्हीं दिनों मुझे कुछ काम से ग्वालियर जाना पड़ा। ग्वालियर में एक फूलबाग नाम की अच्छी जगह है जहाँ पर ज्यादातर लोग घूमने जाते हैं लेकिन शाम को 6 बजे के बाद वहाँ पर दो ही तरह के लोग जाते हैं, या तो लव करने बाले या दलाल!

तो शाम को 7 बजे मैंने सोचा कि कुछ घूम लिया जाए तो मैं वहाँ पर पहुँचा। मुझे अकेला देख एक आदमी आकर बोला- साहब, कुछ मदद करूँ?

मैं समझ गया, बात हुई और सौदा दो हजार में पक्का हुआ। मैं उसके बताये होटल में पहुँच गया।

अब आगे का हाल आँखों देखा-

टाइम साढ़े आठ बजे, होटल के अन्दर वो लड़की शब्बो और मैं!
शब्बो- क्या लेंगे?
मैं- जो तुम दे दो!
शब्बो- मेरा मतलब खाने में?
मैं- बटर पनीर मसाला और जो तुम लो!
शब्बो- ठीक है, आर्डर कर देती हूँ।

थोड़ी देर में वेटर आया और एक इंग्लिश अद्धा और खाना रख कर चला गया।

शब्बो- पहले खाना खा लेते हैं, फिर कुछ करेंगे।
मैंने और शब्बो ने पेग बनाये और हम लोगों खाना और दारू साथ में ली।
शब्बो- यहाँ मैंने पहली बार देखा है आपको?
मैं- हाँ, वैसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, आप अपने बारे में बताएँ कि इस लाइन में कैसे आई आप?

शब्बो- मैं पहले कॉलेज में पढ़ती थी और घर की हालत खस्ता थी क्यूंकि मेरे 4 भाई और 3 बहनें हैं तो घर में खर्च की दिक्कत होती थी। मैं कॉलेज जाती तो बाकी की सहेलियों के पास अच्छे-अच्छे कपड़े और मंहगे मोबाइल होते थे जबकि वे भी मेरे ही जैसे घर ताल्लुक रखती थी।
मैंने एक दिन रुखसाना, जो मेरी सहेली थी, उससे पूछा कि यह सब कैसे ले लेती हो?
तो उसने बताया- तुम चाहो तो यह सब तुम्हारे पास भी हो सकता है।

और उसने बताया कि मेरा एक दोस्त है जो ग्राहक लाकर देता है बस तुमको होटल में जाना है और ग्राहक को खुश करना है, दो घंटे का काम होता है, मुँह माँगा पैसा मिलता है।
घर में तंगहाली होने के कारण मैंने यह सब करना शुरू कर दिया।

मैं- फिर पढ़ाई का क्या हुआ?
शब्बो- पैसा आने लगा तो मुझे पढ़ाई में मजा नहीं आता था और ना जाने क्यूँ मेरी भूख बढ़ने लगी, उसके बाद मैं दिन-रात ग्राहकों के बीच में रहने लगी और घर वालों को बदनामी का सामना न करना पड़े इसीलिए मैं घर से अलग रहने लगी। और आप बताएँ कुछ!
मैं- अब सब छोड़ो, आ जाओ, मूड बनाते हैं।
शब्बो- जरा पप्पू तो दिखाइए?

तभी बाथरूम के अन्दर से कुछ आवाज आई, मैंने बाथरूम के अन्दर जाकर देखा तो एक आदमी एक बड़ा सा थैला लिए छुपा था। मैंने उससे पूछा- तुम अन्दर कैसे आये?

तो उसने बताया- साहब मैं एक चोर हूँ और होटल में चोरी करने आया था, इतने में आप लोग आ गए, इसलिए छुप गया था।

मैंने कहा- मैं होटल वालों को बुलाता हूँ!
चोर बोला- नहीं साहब, ऐसा गजब मत करना, अभी-2 बाहर आया हूँ, आप फिर अन्दर करवा दोगे। मैं आपका होटल और लड़की का खर्च दे दूँगा।

मैंने कुछ देर सोचा, फिर कहा- ठीक है, तो बाहर आ जाओ।

बाहर आने के बाद उसने जैसे ही शब्बो को देखा, बोला- बॉस, क्या माल लेकर आये हो! इसकी तो मैं भी लूँगा।

शब्बो- अबे मादरचोद! तेरी औकात है मेरी लेने की?

चोर- रंडी की औलाद, एक से एक बड़ी बड़ी रण्डियों को चोदा है मैंने।

मैं- देखो आप दोनों लड़ो मत! शब्बो, तुम्हें एक साथ दो लौड़े लेने में परेशानी तो नहीं होगी?
शब्बो- आप कहते हैं तो इसको साथ में ले लो।

जैसे ही शब्बो ने इतना कहा, चोर ने उसको गोदी में उठा लिया और बोला- साहब, मैं बाथरूम में इसको नंगी करता हूँ, आज इसको पहले हम दोनों अपने मूत से नहलायेंगे।

मैं- यह कौन सा तरीका है?
बोला- साहब जैसा मैं कहता हूँ, करते जाओ, बड़ा मजा आयेगा।

शब्बो- मादरचोद, पूरा खेला खाया हुआ लगता है? आओ, दोनों मुझे अपने मूत से नहला दो।
हम दोनों ने शब्बो के ऊपर मूतना शुरू कर दिया, हम दोनों के गर्म पेशाब में उसे बड़ा मजा आ रहा था।

शब्बो- बड़े दिनों बाद कोई ऐसा चोदने वाला मिला है।
चोर- शब्बो, मेरा पेशाब पियो, यह गला साफ़ करता है और चेहरे का रंग चमकाता है।
शब्बो- तो पिलाओ ना! किसने मना किया है।

अब शब्बो ने चोर का लंड मुँह में ले लिया और उसको जोर से चूसने लगी।
मैं- साली, मेरा नहीं लेगी क्या?
शब्बो- ला मेरे राजा, तेरे लौड़े को जन्नत की सैर कराती हूँ।
और वो हम दोनों के लौड़े बड़ी अदा के साथ चूसने लगी।

चोर- मेरा निकलने वाला है।
मैं- मेरा भी निकलने वाला है।
शब्बो- रुको, मैं गिलास लेकर आती हूँ।

वो कांच का गिलास लेकर आई और हम दोनों का वीर्य उसमें निकाल लिया।
मैं- शब्बो, इसको गिलास में क्यों रखा?

शब्बो- अभी तो मेरा भी निकलेगा और इसमें डाल कर शराब मिलायेंगे और तीनो इसका एक एक पेग पियेंगे, जिससे आज की रात हमेशा याद रहे।
चोर- वाह मेरी शब्बो रानी, तू तो मुझसे भी ज्यादा आगे निकली!

और उसके बाद शब्बो की चूत चुदाई का दौर चला।
शब्बो- यह बताओ, मेरी चूत कौन मारेगा और गांड कौन मारेगा?
चोर- मैं तो गांड ही मारूँगा।
शब्बो- तो चल मादरचोद, नीचे आ जा।

चोर नीचे लेट गया उसके लौड़े पर शब्बो ने अपनी गांड का छेद टिकाया और बैठ गई। उसके बाद उसने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया और बोली- मादरचोद, धक्का मार!
चोर- अ… अ… आ… मेरी रानी हूँ हूँ हूँ और ले और ले!

शब्बो- ऊँह… आँ… हाँ… हाँ… हाँ… चोदो मादरचोदो! कस कर मारो! धीरे मारनी थी तो अपनी बहन को चोद लेते! मुझे चोदने आये हो तो लौड़े का दम दिखाओ भेनचोदो!

मैं- अ अह आअ, तेरी माँ की चूत मारूँ कुतिया! भेन की लौड़ी, दो लंड लेने का शौक है तुझे?…ये ले!…ये ले!

चोर- ले तेरी माँ की चूत मारूँ! आज तेरी गांड का भोसड़ा नहीं बनाया तब कहना! और ले।

शब्बो- चोदो और चोदो, इतना चोदो कि दोनों छेदों से जब भी कोई चीज निकले उसका पता भी नहीं चले! चाहे वो मूत हो या मल! हु… हु… हु… चोद… चोद… मार… और मार… गांड और चूत मेरी फटेगी… तुम लोग फिक्र मत करो… चोदो रे… जोर से चोदो…ओ ओ… ओ… या… या… या… अआह…हहा…हाहा…

अब वो झड़ने वाली थी, मुझे बोली- गिलास लेकर आओ वो वाला!

मैंने गिलास उठाया और उसकी चूत से लगा दिया। मैंने आज तक ऐसा नहीं देखा था, उसका वीर्य तो हम लोगों से भी ज्यादा निकला।

शब्बो- तुम दोनों अपने लंड यहाँ लाओ।

वो हम दोनों के लौड़े चूसकर उनका रस निकालने लगी और हम दोनों का वीर्य उसने फिर एक बार उस गिलास में डलवा दिया।
अब वो दारू की बोतल लेकर आई, पहले उसने तीनों गिलास में बराबर वो वीर्य डाला, फिर तीनों गिलास में उसने पेग बनाये, हम तीनों ने वो पेग खाली किया, उसके बाद चोर खिड़की से भाग गया।

शब्बो- वो पैसा देकर गया या नहीं?
मैं- नहीं!
शब्बो- तो उसका चार्ज भी आपको देना होगा।
मैं- उसका कितना लगेगा?
शब्बो- तीन हजार रुपया!
मैं- पर मेरे पास तो इतना नहीं है?

शब्बो- तो कल्लन भाई की मार के लिए तैयार रहना!
मैं- यह कल्लन भाई कौन है?
शब्बो- मेरा दलाल!
मैं- और कोई रास्ता नहीं है?
शब्बो- एक रास्ता है!
मैं- वो क्या?
शब्बो- कल्लन भाई के पास कुछ नबाबी शौक रखने वाले लोग आते हैं बस किसी एक ग्राहक को खुश करना होगा, तुम्हारा हिसाब बराबर हो जायेगा।
मैं- नबाबी शौक का मतलब?

शब्बो- अबे चूतिये! गांड मरवानी होगी! तेरी तो वैसे भी चिकनी है! और एक राज की बात बताऊँ, अगर एक बार गांड मरवा लेगा तो तुझे एहसास होगा कि कितना मजा आता है इसमें!